गुरुवार 1 जनवरी 2026 - 14:22
उलेमा और दानिशवरों का सम्मान एक अख़्लाक़ी फ़र्ज़ है

हौज़ा / आयतुल्लाह जाफ़र सुब्हानी ने उस्ताद मोहम्मद अली मेंहदवी राद के एज़ाज़ में होने वाली तक़रीब के नाम अपने पैग़ाम में कहा है कि उलेमा और दानिशवरों की इज़्ज़त और तकरीम एक अख़लाक़ी ज़िम्मेदारी है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , उस्ताद मोहम्मदअली मेंहदवी राद के सम्मान में एक तक़रीब आज जुमेरात, 11 रजबुल-मुरज्जब को क़ुम मुक़द्दस में मुनअक़िद हुई। इस मौके पर आयतुल्लाहिल उज़्मा सुब्हानी का पैग़ाम इस तरह है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

उलेमा और दानिशवर इल्म और सक़ाफ़त के रौशन मीनार होते हैं। वे उन चराग़ उठाने वालों की तरह हैं जो तहक़ीक़ करने वालों को सही रास्ता दिखाते हैं, और समाज उनके अफ़कार और इल्मी तहक़ीक़ से फ़ायदा उठाता है।

इसी वजह से उनकी तकरीम करना एक अख़लाक़ी फ़र्ज़ है। जैसे हर उस शख़्स पर उस्ताद का सम्मान ज़रूरी होता है जिसने उसके इल्म से फ़ायदा हासिल किया हो।हज़रत इमाम हसन अस्करी (अलैहिस्सलाम) से रिवायत है कि जब एक आलिम मजलिस में दाख़िल हुआ तो आपने उसे अपने रिश्तेदारों पर तरजीह दी और सद्र-ए-मजलिस में जगह दी।

जब इस पर एतराज़ किया गया तो आपने फ़रमाया:यह शख़्स अपने इल्मी और दलीली दिफ़ा के ज़रिये दुश्मनों पर ग़ालिब आता है।अज़ीम आलिम हुज्जतुल इस्लाम वल मुसलिमीन मोहम्मदअली मेंहदवी राद इस उसूल की रौशन मिसाल हैं। उन्होंने जवानी से आज तक इस्लामी सक़ाफ़त के मुख़्तलिफ़ मैदानों में क़ीमती तहक़ीक़ी ख़िदमात अंजाम दी हैं।ख़ास तौर पर उनके क़ुरआनी और तारीख़ी काम बहुत उम्दा और रहनुमाई करने वाले हैं।

इसके अलावा तहक़ीक़ के उसूल और तरीक़े में भी उन्होंने नए और जदीद अंदाज़ अपनाए। मजल्ला आयीन-ए-पज़ोहिश” उनके इल्मी इब्तिकारात में से है, जो ख़ुशी की बात है कि अब तक लगातार शाए हो रहा है।

मैं उन तमाम अज़ीज़ लोगों को सलाम पेश करता हूँ जिन्होंने हौज़ा और यूनिवर्सिटी की इस इल्मी शख़्सियत के सम्मान में होने वाले प्रोग्राम में शिरकत की। और अल्लाह तआला से जनाब महदवी राद के लिए बढ़ती हुई तौफ़ीक़ात की दुआ करता हूँ।

उम्मीद है वे मेरी तरफ़ से इस मुख़्तसर क़दरदानी को क़बूल फ़रमाएंगे, जबकि उनका इल्मी मक़ाम इससे कहीं ज़्यादा का हक़दार है।

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